भारतीय स्टेट बैंक ने मुफ्त सुविधाओं की घोषणा के प्रति चेतावनी देते हुए कहा भविष्य में इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ सकता है

कीमतों में बदलाव तथा संसाधनों के गलत तरीके से आवंटन के कारण अक्षमता पैदा हो सकती है। तीन राज्यों का उदाहरण देते हुए भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा है कि छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान में वार्षिक पेंशन देनदारी का बोझ अनुमानित तौर पर तीन लाख करोड़ रुपये है।

post by Sakshi Singh | 5:00pm on 4th Oct 2022 Tuesday
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अपनी आर्थिक रिपोर्ट में स्टेट बैंक ने सुझाव दिया है कि उच्चतम न्यायालय की समिति इस तरह की कल्याण योजनाओं को राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद के एक प्रतिशत या उनके अपने कर संग्रह के एक प्रतिशत तक सीमित कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन राज्यों के अपने कर-राजस्व के संदर्भ में झारखण्ड पर पेंशन का बोझ 217 प्रतिशत, राजस्थान पर 190 और छत्तीसगढ़ पर 207 प्रतिशत है। रिपोर्ट में बजट से अलग राज्यों के ऋणों पर भी उंगली उठाई गई है, जो उनकी अपनी संस्थाओं से लिए गए हैं और जिनकी गारंटी राज्यों ने दी है। इस तरह के ऋण 2022 तक सकल घरेलू उत्पाद के चार दशमलव पांच तक पहुंच गए हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुफ्त सुविधाओं के साथ-साथ यदि आकस्मिक खर्च के बोझ को जोड़ दिया जाए तो यह सभी राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद के दस प्रतिशत तक हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी समस्याओं का समाधान अवश्य खोजना होगा अन्यथा राजकोषीय आत्महत्या की स्थिति पैदा हो जाएगी।